साल बेमिसाल 2018

कुछ साल बेमिसाल होते हैं
एक साल के ही होते हैं बेशक
पर चर्चे उनके कई साल होते हैं
कुछ साल बेमिसाल होते हैं…..

तारिखें बदलती हैं जैसे बदला करती है
दिन आते हैं वही हफ्ते के साथ
पर कुछ तारीखों के किस्से कमाल होते हैं
कभी डायरी के पन्नों में,
तो कभी नीली इंक के बीच लाल होते हैं
कुछ साल बेमिसाल होते हैं…..

वक़्त को थाम लेते हैं कुछ घण्टे
कुछ मिनटों में ज़िन्दगी समा जाती है
कभी ज़िन्दगी सामने आ जाती है हमारे
कभी कुछ हसरते पूरी हो जाती हैं
पूरे साल का एक साल
और उस साल में हमारे अपने कई साल होते हैं
कुछ साल बेमिसाल होते हैं

मेहरबान खुदा होता है कभी हमपर
कभी नेमत उसकी हम पर बरसती है
कभी वो हमें हंसाता है देकर खुशियां हज़ार
कभी ज़िन्दगी हमारी संग में हंसती है
कभी सालों में ज़िन्दगी, कभी ज़िन्दगी में कई साल होते हैं,
कुछ साल बेमिसाल होते हैं
कुछ साल कमाल होते हैं।

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माँ

माँ…शब्द मात्र नहीं एहसास है
ईश्वर भी नतमस्तक जिसके सामने
वो स्नेह की अनुभूति, वो अलौकिक प्रकाश है
माँ…शब्द मात्र नहीं एहसास है

शक्ति की सूरत भी है
त्याग की मूरत है वो
ममतामयी जीवनदायनी
हर रिश्ते से खूबसरत है वो
जब जब असफलता घेरती हमें,
हिम्मत मिली उसीसे ,मिली उसीसे हर आस है
माँ…शब्द मात्र नहीं एहसास है

ख्याल रखती वो हर पल हमारा
हर घड़ी हमसे जुड़ी उसकी धड़कन है
समझ सके जो हमारा हर इशारा
हमारी ख़ुशी में ही खुश हो उठता उसका मन है
बिन मांगे जो लुटाती हम पर स्नेह अपना
बिन बोले वो समझे गर हम निराश हैं
माँ…शब्द मात्र नहीं एहसास है

ईश्वर की सबसे खूबसूरत कृति वो
बनाकर जिसे वो भी सर झुकाता है
अपनेआप में ही एक पूरी संस्कृति वो
छूकर चरण मात्र जिसके जीवन सफल हो जाता है
ईश्वर से भी बढ़कर स्थान उसका
उससे जुड़ा हर शख्श ख़ास है
माँ…शब्द मात्र नहीं एहसास है

ख्वाब और हकीकत

Dream is not the thing you see in sleep but is that thing that doesn’t let you sleep: A.P.J Abdul kalam

“सपने वो नहीं जो आप नींद में देखते हैं, बल्कि सपने वो है। जो आपको सोने नहीं देते।”

यह कथन हर पहलू में सत्य साबित होता है। जब हमारे अंदर किसी चीज को प्राप्त करने की इच्छा जाग्रत होती है ,धीरे धीरे वो हमारा ख्वाब और हमारा लक्ष्य बन जाती है। तब वो हमारे ख्वाबों में नहीं हकीकत में हमें नजर आने लगती है। हम उसे पा लेना चाहते हैं, जल्द से जल्द हम उस तक पहुंचना चाहते हैं और तब शुरू होता है हमारे संघर्ष। एक ऐसा संघर्ष जिसका परिणाम हमें नजर आ रहा होता है। हम खुद को उस स्थान पर देखकर प्रफुल्लित हो उठते हैं और ये एहसास हमें शक्ति देता है आगे बढ़ने की, कुछ कर गुजरने की।

बेशक ये एहसास हमारे जीवन के लिए बहुत मायने रखता है। ख्वाबों का होना हमारे लिए उतना ही आवश्यक है जितना कि अँधेरी रात में एक चाँद की चांदनी का होना। जिस तरह चांदनी अँधेरे को पाटती है उसी तरह हमारे ख्वाब हमारे इस मुश्किलों भरे जीवन को खूबसूरत बनाते हैं। हमारे जज्बे को निखारने में मदद करते हैं और हमें कुछ भी कर गुजरने की ताकत देते हैं।

लेकिन एक सवाल जो इन ख्वाबों के साथ जुड़ा हुआ है वो है हकीकत। हमारे जीवन में या तो कुछ ख्वाब है या हकीकत। हकीकत, जिसमें हम आज जी रहे हैं, जो है । कभी कभी हम ख्वाबों में इतना उलझ जाते हैं कि हकीकत को भूल जाते हैं और तब शुरू होता है एक तनाव जो हमें ये सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हमें कुछ मिलेगा या नहीं।

विचार कीजिये आपको एक अवसर मिलता है आपके नजदीकी पर्यटन स्थल पर छुट्टियां बिताने का।लेकिन आपका ख्वाब है कि आप लद्धाख, ऊटी, शिमला आदि बेहतरीन स्थलों पर छुट्टियां बिताने जाएँ जो की किन्हीं कारणों से अभी पूरा नहीं हो सकता। आप मन मसोसकर रह जाते हैं कि क्या आप कभी वहां जा पाएंगे , आज वहां जाते तो कितना अच्छा होता। यह सोचकर आप यहां भी नहीं जा पाते जहां आप अभी जा सकते हैं।बेशक आप का ख्वाब कल पूरा हो जाएगा लेकिन आपने जो आज खोया वो आपको दोबारा नहीं मिल सकता।

ख्वाब देखना और उसे पूरा करने की ताकत रखना सही है और ये हर किसी को करना चाहिए । लेकिन वहीं आज में, अपनी हकीकत में जीने का जो आनंद है उसे खो देना गलत है। जो आज में भी जीते हैं वो कल पीछे मुड़कर देखें तो यादों का एक पिटारा पाएंगें।

हकीकत को स्वीकार कर आज में जीना और अपने ख्वाबों के लिए प्रयास करते रहना ही ज़िन्दगी है। इसे सिर्फ बड़े ख्वाबों में बांधकर मत रखिये वरना छोटे छोटे खूबसूरत पल पीछे छूट जाएंगे।

कौन हूँ मैं

कौन हूँ मैं?
पूछकर यह सवाल खुद से ,
कभी खुद ही जवाब बन जाती हूँ
और कभी यूँ उलझ सी जाती हूं इस सवाल में
जैसे उलझा हो कोई कीट अपने ही बुने जाल में

कभी लगता है में हूँ समंदर….
जो लड़ता है अपनी ही लहरों से
साहिल तक आने के खातिर
और वापस लौट जाता है खुद ही
जैसे पिंजरे में लौट आया हो कोई पंछी नील गगन को छोड़कर

कभी सोचकर बातें कई…….
अपनी कल्पनाओं के घरोंदे बना लेती हूँ में
कभी खुदको उनमें कभी उन्हें खुदमें बसा लेती हूँ में
और फिर तोड़ देती हूँ उन्हें अपने हीे हाथों से
जैसे कोई सपना टूट चुका हो नींद से पहले ही

कभी आसमान फ़तेह कर लेने का जज्बा लिए
कभी ज़िन्दगी का हर मुकाम हासिल कर लेने का इरादा लिए
कभी हर सीमा पार कर जाने का ख्वाब लिए निकलती हूँ
पर फिर यूँ ही राह में रुक जाती हूँ में
जैसे कोई मुसाफिर थम गया हो मंजिल को देखकर अपनी

क्या कोई शोर हूँ, या हूँ संगीत कोई
मैं ख्वाब हूँ किसीका या हकीकत कोई
जलती लौ हूँ में ये बुझा एक चिराग हूँ
मैं शीतल नीर सी या फिर धधकती आग हूँ
कौन हूँ मैं?

निराशा…..

क्या है निराशा? निराशा का कारण क्या चन्द समस्याएं हैं या कुछ और? जीवन के कुछ अनुभव और कुछ अवलोकन के बाद एक विचार पर आकर दिमाग की सुई अटकी कि निराशा एक विचार से उत्पन्न हुई एक बीमारी है जो वक़्त के साथ बढ़ती ही जाती है।और ये विचार कोई और हमारे मस्तिष्क में नहीं डालता। ये आता है हमारे सोचने की क्षमता के गलत इस्तेमाल से।सोचने की जो क्षमता इंसान को मिली है वो दुनिया की हर ताकत से बढ़कर है। लेकिन तब, जब इसका उपयोग सही समय पर सही तरीके से सही दिशा में किया जाए।निराशा का जन्म होता तो एक समस्या के उत्पन्न होने पर ही है लेकिन इसका मूल कारण है हमारे विचार। विचार जो हमारे मन में चौबीसों घण्टे कोलाहल करते रहते हैं, जो हमें एक अलग दुनिया में विचरण करने के लिए मजबूर करते हैं। विचारों का होना गलत नही है पर विचारों का सही चयन बहुत जरुरी है । अन्यथा जन्म लेती है निराशा।

विचार कीजिये कि आप एक कुँए के अंदर हैं और वो कुआं ही आपकी समस्या है। आप वहाँ बैठकर कुँए के बारे में विचार कर रहे हैं के आप यह फंस चुके हैं। फिर आप वहां पर होने वाले परिणामों के बारे में विचार करने लगते हैं कि अगर ऐसा हुआ तो क्या होगा। आप डरने लगते हैं। आप निराश हो जाते हैं। आप हार जाते हैं। एक गलत विचार आपको हराने की ताकत रखता है। इसके बदले अगर आप वहां से बाहर निकलने के अवसरों के बारे में विचार करें तो आप अच्छा महसूस करेंगे आपको लगेगा कि समस्या छोटी हो गयी है। आप निराश नही होंगे।

तो यही करते हैं हम अपने जीवन में आई समस्याओं के साथ। हम समस्या में इतना उलझ जाते हैं कि उससे निकलने के अवसरों को तलाश ही नहीं पाते। अंत में फिर बस निराशा ही हाथ लगती हैं

निराश मत होइए , अपने विचारों का चयन भली भांति कीजिये, समस्या नही समाधान पर अपना ध्यान केंद्रित कीजिये। आधी जंग आप जीत चुके होंगे।